Dr. B R Ambedkar की 130वीं जयंती, जानिए क्या है इस दिन का महत्व

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Dr. BR Ambedkar की 130वीं जयंती, जानिए क्या है इस दिन का महत्व
Dr. BR Ambedkar की 130वीं जयंती, जानिए क्या है इस दिन का महत्व

Dr. BR Ambedkar भारतीय संविधान के निर्माता और आजाद भारत के पहले कानून एवं न्याय मंत्री थे. 14 अप्रैल, 1981 को एक ब्रिटिश सूबेदार के घर में जन्मे आंबेडकर रामजी मलोजी सकपाल और भीमाबाई सकपाल की चौदहवीं संतान थे. आंबेडकर का जन्म मध्य प्रदेश के महू जिले में स्थित मिलट्री कैंटोनमेंट में हुआ था. उन्हें बचपन से ही यह एहसास होता रहा कि उन्होंने एक अछूत परिवार में जन्म लिया है. उन्हें अपनी जाति के बच्चों के साथ कक्षा में एक अलग कोने में बैठना पड़ता था.

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Ambedkar को पानी के लिए चपरासी पर निर्भर

उन्हें स्कूल में पानी पीने के लिए उच्च जाति के बच्चों पर निर्भर रहना पड़ता था. जब उच्च जाति के बच्चे नल चलाते थे, तभी आंबेडकर एवं निम्न जाति के बच्चे पाने पी सकते थे. स्कूल में पानी पीने के लिए अधिकतर आंबेडकर को स्कूल के चपरासी पर निर्भर रहना पड़ता था जिस दिन स्कूल का चपरासी छुट्टी पर रहता था, उस पूरे दिन आंबेकर को प्यासा रहना पड़ता था.

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भारतीय रिजर्व बैंक को बनाने में अहम भूमिका 

आंबेडकर को देश के ज्यादातर लोग सिर्फ भारतीय संविधान के निर्माता के रूप में जानते हैं, लेकिन यह बहुत कम लोग जानते हैं कि उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक को बनाने में बहुत अहम भूमिका निभाई थी.

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2015 से Ambedkar जयंती को सार्वजनिक

2015 से अबेडकर जयंती को सार्वजनिक अवकाश घोषित कर दिया गया है. उन्हें 31 मार्च 1990 को मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया था. बाबासाहेब का जीवन सचमुच संघर्ष और सफलता की ऐसी अद्भुत मिसाल है.

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Ambedkar के विचार

डॉ. आंबेडकर के  विचार आज भी प्रासंगिक हैं. अगर आज की युवा पीढ़ी में अगर कहीं ये सवाल है कि आंबेडकर का उनकी पीढ़ी को क्या योगदान है तो जानिए उनके विचारों को जो आज भी लोगों द्वारा अपनाए जाते रहे हैं.

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यदि मुझे लगा कि संविधान का दुरुपयोग किया जा रहा है, तो मैं इसे सबसे पहले जलाऊंगा.

जब तक आप सामाजिक स्वतंत्रता नहीं हासिल कर लेते,कानून आपको जो भी स्वतंत्रता देता है वो आपके लिये बेमानी है.

एक विचार को भी प्रसार की आवश्यकता होती है जितनी की पौधे को पानी की आवश्यकता होती है। नहीं तो दोनों मुरझा जाएंगे और मर जाएंगे.

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विदेशों में भी उनकी जन्म जयंती

देश के साथ साथ विदेशों में भी उनकी जन्म जयंती को उत्सव के रूप में मनाया जाता है. इसी दिन बाबासाहेब के कामों के बारे में लोगों को बताया जाता है. इतना ही नहीं, जगह-जगह कार्यक्रमों का आयोजन कर समाज में बुराइयों को खत्म करने की भी अपील की जाती है. इसके अलावा, वाद विवाद और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाता है.

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