भारत को मिला तीसरा कोरोना टीका Sputnik V , सीमित आपात इस्तेमाल की मंजूरी

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भारत को मिला तीसरा कोरोना टीका Sputnik V , सीमित आपात इस्तेमाल की मंजूरी
भारत को मिला तीसरा कोरोना टीका Sputnik V , सीमित आपात इस्तेमाल की मंजूरी

India receives third corona vaccine Sputnik V, limited emergency use approved

भारत के DCGI (Drugs Controller General of India) ने कुछ शर्तों के साथ रूस के कोविड-19 टीके SputnikV [स्पूतनिक-V] को सीमित आपात इस्तेमाल [Limited emergency use] की मंजूरी दे दी है. इसके साथ ही देश में तीसरे कोरोना टीके SputnikV की उपलब्धता [Availability] का रास्ता साफ हो गया.

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बता दें कि DCGI ने भारत बायोटेक के ‘कोवैक्सीन’ [Covaxine] और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया [Serum Institute of India] द्वारा निर्मित ऑक्सफोर्ड-एस्ट्रोजेनेका [Oxford-AstraZeneca] के ‘कोविशील्ड’ [Covishield] टीके को पहले ही आपात इस्तेमाल [ limited emergency] की मंजूरी जनवरी में दे दी थी.

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इसकी आधिकारिक घोषणा SputnikV के ट्विटर हैंडल ने की थी. ट्वीट में कहा गया था कि ‘दूसरे सबसे अधिक आबादी वाले देश भारत ने लोकल फेज 3 क्लिनिकल स्टडी के सकारात्मक परिणामों के बाद SputnikV को मंजूरी दी. भारत SputnikV को मंजूरी देने वाला 60वां देश बन गया. SputnikV अब 60 देशों में 3 से अधिक लोगों की आबादी के लिए अधिकृत है.’

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कोविशील्ड व कोवैक्सीन के बाद अब स्पुतनिक

देश में फिलहाल एस्ट्राजेनेका की कोविशील्ड व भारत बॉयोटेक [Bharat Biotech] की कोवैक्सीन [Covaxine] से टीकाकरण किया जा रहा है. कोविशील्ड [Covishield] 80 फीसदी असरकारी है, जबकि कोवैक्सीन [Covaxine] 81. रूसी वैक्सीन SputnikV इन दोनों के मुकाबले ज्यादा असरकारी बताई जा रही है. इसकी कीमत भी 700 रुपये से कुछ अधिक रहेगी. लेकिन हो सकता है भारत में सरकार इन टीकों को कम कीमत मुहैया कराये.

बता दें कि SputnikV ट्रायल में 91.6 फीसदी असरकारी पाई गई है. इस वैक्सीन का काम शरीर में पहले से मौजूद एडेनोवायरस [Adenovirus] को नष्ट करना है, ताकि संक्रमित व्यक्ति गंभीर श्वसन रोग [Respiratory disease] का शिकार न हो. रूस के गमलेया रिसर्च सेंटर द्वारा विकसित वैक्सीन ‘स्पूतनिक-वी’ का ट्रायल भारत में हैदराबाद की जानी-मानी कंपनी डॉ. रेड्डीज लेबोरेटरीज [Dr. Reddy’s Laboratories] ने किया.

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59 देश दे चुके हैं मंजूरी

SputnikV  को अब तक 59 देश मंजूरी दे चुके हैं. इनमें संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), बेलारूस, सर्बिया, बोलिविया, अर्जेंटीना, वेनेजुएला, फिलिस्तीन, अल्जीरिया, तुर्कमेनिस्तान और पैराग्वे शामिल हैं.

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रूस की पहली सैटेलाइट से मिला वैक्सीन को नाम

इस वैक्सीन का नाम रूस की पहली सैटेलाइट Sputnik से मिला है. जिसे रूस ने 1957 में रूसी अंतरिक्ष एजेंसी ने लॉन्च किया था. उस समय भी रूस और अमेरिका के बीच अंतरिक्ष होड़ [Space competition] चरम पर थी. कोरोना वायरस वैक्सीन के विकास को लेकर भी अमेरिका और रूस के बीच प्रतिद्वंदिता चल रही थी.

रूस के इस टीके की खुराक दो अलग-अलग खुराक 21-21 दिन के अंतराल में दी जाती है. आमतौर पर सभी कोरोना वैक्सीन की दोनों खुराक में एक ही दवा दी जाती है, लेकिन स्पूतनिक-वी की दोनों खुराक में अलग-अलग दवा दी जाती है.

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