म्यांमार में आपातकाल या फिर कोई चाल ? 1 साल की इमरजेंसी

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म्यांमार में आपातकाल या फिर कोई चाल ? 1 साल की इमरजेंसी
म्यांमार में आपातकाल या फिर कोई चाल ? 1 साल की इमरजेंसी

म्‍यांमार में सेना ने देश की नेता आंग सांग सू की और राष्‍ट्रपति यू विन म्यिंट को अरेस्‍ट कर लिया है। सेना की ओर से संचालित टीवी पर सोमवार को कहा गया कि सेना ने देश को अपने कब्‍जे में ले लिया है और एक साल के लिए आपातकाल घोष‍ित कर दिया है.

पूर्व जनरल तथा उपराष्‍ट्रपति मिंट स्‍वे को कार्यकारी राष्‍ट्रपति बनाया गया है। उन्‍हें सेना प्रमुख का भी दर्जा दिया गया है। बताया जा रहा है कि किसी भी विरोध को कुचलने के लिए सड़कों पर सेना तैनात है और फोन लाइनों को बंद कर दिया गया है।

सेना के स्वामित्व वाले ‘मयावाडी टीवी’ ने देश के संविधान के अनुच्छेद 417 का हवाला दिया जिसमें सेना को आपातकाल में सत्ता अपने हाथ में लेने की अनुमति हासिल है. सेना ने 2008 में संविधान तैयार किया और चार्टर के तहत उसने लोकतंत्र, नागरिक शासन की कीमत पर सत्ता अपने हाथ में रखने का प्रावधान किया। मानवाधिकार समूहों ने इस अनुच्छेद को ‘संभावित तख्तापलट की व्यवस्था’ करार दिया था।

म्यांमार की  संविधान में कैबिनेट के मुख्य मंत्रालय और संसद में 25 फीसदी सीट सेना के लिए आरक्षित है, जिससे नागरिक सरकार की शक्ति सीमित रह जाती है और इसमें सेना के समर्थन के बगैर चार्टर में संशोधन से इनकार किया गया है.

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सू ची की पार्टी ने नवंबर में हुए संसदीय चुनाव में 476 सीटों में से 396 सीटों पर जीत हासिल की। म्यांमार की केंद्रीय चुनाव आयोग ने परिणाम की पुष्टि की है. लेकिन चुनाव होने के कुछ समय बाद ही सेना ने दावा किया कि 314 शहरों में मतदाता सूची में लाखों गड़बड़ियां थीं जिससे मतदाताओं ने शायद कई बार मतदान किया या अन्य ‘चुनावी फर्जीवाड़े’ किए. जोलीफे ने कहा, ‘लेकिन उन्होंने उसका कोई सबूत नहीं दिखाया।’

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चुनाव आयोग ने पिछले हफ्ते दावों से इंकार किया और कहा कि इन आरोपों के समर्थन में कोई सबूत नहीं है. चुनाव के बा नई संसद के पहले ही दिन सेना ने तख्तापलट कर दिया। सू ची और अन्य सांसदों को पद की शपथ लेनी थी लेकिन उन्हें हिरासत में ले लिया गया। ‘मयावाडी टीवी’ पर बाद में घोषणा की गई कि सेना एक वर्ष का आपातकाल समाप्त होने के बाद जीतने वाले को सत्ता सौंप देगी.

म्यांमार में सुबह और दोपहर तक संचार सेवाएं ठप हो गईं. देश के कई अन्य स्थानों पर भी इंटरनेट सेवाएं बाधित हैं। देश के सबसे बड़े शहर यांगून में कंटीले तार लगाकर सड़कों को जाम कर दिया गया और सिटी हिल जैसे सरकारी भवनों के बाहर सेना तैनात है. काफी संख्या में लोग एटीएम और खाद्य वेंडरों के पास पहुंचे और कुछ दुकानों एवं घरों से सू ची की पार्टी नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी के निशान हटा दिए गए.

Written By : Somyita Bisht

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