यूपी: 812 फ़र्ज़ी teachers पर हुआ केस

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UP: Case on 812 fake teachers
UP: Case on 812 fake teachers

UP: Case on 812 fake teachers

आर्डर दिया गया है की 812 फ़र्ज़ी teachers को निकला जाएगा साथ ही उन पर केस भी किया जायेगा. ये 812 teachers की फेक और टेम्पर्ड बीएड डिग्री से टीचर बने थे. उत्‍तर प्रदेश के अम्बेडकर विश्वविद्यालय आगरा की वर्ष 2005 में इन सरे teachers को बर्खास्त कर दिया गया है | फरवरी 26 को हाई कोर्ट ने सेक्रेट्री बेसिक एजुकेशनल कौंसिल प्रताप सिंह बघेल ने ये आर्डर दिया है की बेसिक एजुकेशन ऑफिसर्स को इन 812 फेक teachers पर केस दर्ज़ करने का आर्डर दिया है.

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SIT जांच 

यही नहीं SIT इन्वेस्टीगेशन में ऐसा पता चला था की 1356 फेक डिग्रीज वाले teachers चिह्नित हुए थे. और इन में से 1140 लोगो की सैलरी रुक भी दी गयी है. 13 अभ्यर्थियों (teachers) के खिलाफ रिकवरी की भी कार्रवाई की गई है. सचिव ने आदेश दिया है कि यदि विश्वविद्यालय किसी अभ्यर्थी के अंकपत्र को टेम्पर्ड घोषित करता है तो उस दिन से उसकी सेवा समाप्त मानी जाएगी. आदेश की तिथि से चार महीने तक जब तक विश्वविद्यालय का निर्णय नहीं आ जाता तब तक संबंधित शिक्षक की सेवा जारी रहेगी.

BSA (Basic Shiksha Adhikar)

अगर इन फेक teachers को दूसरे डिस्ट्रिक्ट ट्रांसफर किया गया तो उसके लिए  BSA को इन्फॉर्म करना होगा. पर कुछ भी हो गए जाये फेक teachers की सजा ताली नहीं जाएगी और इन पर एक्शन्स जरूर लिया जायेगा . हाई कोर्ट ने आगरा यूनिवर्सिटी को 4 महीने का समय दिया है फेक teachers पर केस दर्ज़ करने के लिए.

फेक मार्कशीट

मार्कशीट के साथ छेड़छाड़ के आरोपियों की जांच चार महीने में पूरी करने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने एकल पीठ की ओर से विश्वविद्यालय को दिए जांच के आदेश को सही माना है. कोर्ट ने कहा कि जांच होने तक चार महीने तक ऐसे अध्यापकों की बर्खास्तगी स्थगित रहेगी. वे वेतन सहित कार्य करते रहेंगे. यह जांच परिणाम पर निर्भर करेगा. कोर्ट ने जांच की निगरानी कुलपति को सौंपा है. कहा कि जांच में देरी हुई तो उन्हें वेतन पाने का हक नहीं होगा. जांच की अवधि भी नहीं बढ़ेगी.

199 के खिलाफ केस दर्ज़

बेसिक एजुकेशन डिपार्टमेंट ने अभी तक 201 फ़र्ज़ी teachers को निकल दिया गया है और 199 के खिलाफ केस दर्ज़ कर चुके है.

पूरा मामला

आगरा विश्वविद्यालय की 2005 की बीएड की फर्जी डिग्री के आधार पर हजारों लोगों ने सहायक teachers की नियुक्ति प्राप्त कर ली. हाईकोर्ट ने जांच का आदेश देते हुए एसआइटी गठित की. एसआइटी ने अपनी रिपोर्ट में व्यापक धांधली का खुलासा किया। सबको कारण बताओ नोटिस जारी की गयी. इसमें 814 लोगों ने जवाब दिया, शेष जवाब देने आये ही नहीं। बीएसए ने अंकपत्र से छेड़छाड़ व फर्जी अंकपत्र की दो श्रेणियों वालों को बर्खास्त कर दिया. हाईकोर्ट की एकल पीठ ने अंकपत्र में छेड़छाड़ करने के आरोपियों की विश्वविद्यालय को जांच करने का निर्देश दिया. कहा कि बर्खास्त शिक्षकों से अंतरिम आदेश से लिए गये वेतन की बीएसए वसूली कर सकता है.

 

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